जिले में ड्रमों में बनाई जा रही ताड़ी? घोषित एक मालिक एक अधोषीत अनेक.!

169

जिले में ड्रमों में बनाई जा रही ताड़ी? घोषित एक मालिक एक अधोषीत अनेक.!

चंद्रपुर शहर में बिक रही ताड़ी शुद्ध या अशुद्ध?


चंद्रपुर शहर/महाराष्ट्र
दि: 01 सप्टेंबर 2022

पुरी खबर:-  चंद्रपुर शहर के सड़क किनारे लगी ताड़ी की दुकान पर मिलावट का खेल पूरे जोरों पर है? सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार ताड़ी में नशीली गोलियां और नशीला पाउडर मिला कर बिक्री की जा रही है? जिसका युवकों से लेकर उम्रदराज लोग भरपूर सेवन रहे हैं। आबकारी विभाग जान कर भी अंजान क्यों बना हुआ है?

विभिन्न प्रकार के हथकंडे अपनाए जा रहे..!

प्रात: कमर के पीछे ताड़ी की मटकी लटका कर ताड़ी के पेड़ से चढ़ता-उतरता व्यक्ति देखने में किसी कलाबाज से कम नहीं लगता लेकिन ताड़ी पीने के इंतजार में बैठे लोग भी नहीं जानते कि उन्हें नशीला पदार्थ मिलाकर ताड़ी पिलाई जा रही है.! जिसे आम आदमी ताड़ का अमृत समझ कर पी रहे हैं वास्तव में वह एक जहरीला पेय है। जो उन्हें धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में ले रहा हैं। उन्हें इसका पता भी नहीं है। बुजुर्गो की माने तो ताड़ी पेट के लिए संजीवनी का काम करती है और यदि ताड़ी पीते-पीते उल्टी हो जाए तो कहा जाता है कि पूरी साल के लिए उदर रोगों की छुट्टी मिल जाती है। यूं तो ताड़ के पेड़ों का हिसाब किताब तहसील स्तर पर होता है और भले ही यह पेड़ किसी किसान के खेत पर लगा हो लेकिन उसे काटने का अधिकार उसे नहीं है। हां प्रत्येक ताड़ के पेड़ से रायल्टी के रूप में किसान को धन अवश्य मिल जाता है। सरकार को इन पेड़ों से भारी आर्थिक कमाई होती है।

नशीले पाउडर तथा गोलियां मिलाकर ताड़ी को जहर बनाकर बेच रहे हैं? 

जानकारी के अनुसार नीलामी के जरिए ताड़ी का ठेका लेने वाले परवाना धारक अपनी नीलामी की धनराशि निकालने के लिए विभिन्न प्रकार के हथकंडे अपना रहे हैं। और ताड़ के पेड़ से निकलने वाले रस में नशीले पाउडर तथा गोलियां मिलाकर ताड़ी को जहर बनाकर बेच रहे हैं? कभी-कभी इस जहरीली ताड़ी से जीवन को खतरा भी पैदा हो जाता है। वहीं आबकारी विभाग इसके बदले परवाना धारकों से मोटी रकम वसूल कर इन ताड़ी विक्रेताओं के गोरखधंधे से नजर फेरे हुए हैं?

ताड़ी की इन दुकानों में ड्रोम में भरकर ताड़ी आ कहां से रही?

शुद्ध ताड़ी की ही बिक्री करेगा।

ताड़ी सेवन करने वालों की मानें तो ताड़ी का चढ़ा नशा उतरते समय सिर दर्द और बदन दर्द होता है जिससे ताड़ी में नशीला पदार्थ मिलाने की आशंका पूरी तौर पर जाहिर होती है.! ताड़ के पेड़ों की शासनादेश के तहत नीलामी होती है और परवाना धारकों को हलफनामा देना होता है कि वह शुद्ध ताड़ी की ही बिक्री करेगा। नशीले पदार्थ मिला कर बेचने का मामला यदि पकड़ में आएगा तो परवाना निरस्त किया जा सकता है तथा आपराधिक मुकदमा भी पंजीकृत कराया जा सकता है।

सुत्रो द्वारा जानकारी के अनुसार चंद्रपुर शहर के ताड़ी विक्रेताओं ने संकल बना ली है जीसे तोड़ना मुस्किल ही नहीं नामुमकिन दिखाई पडता है यदि कोई जानकार ताड़ी के विषय को लेकर कदम बढ़ाता है तो यह लोग उसे साझेदार (पार्टनर) बना लेते है। जानकारी यह भी है की शहर की एक एक दुकानों पर 
कई कई अधोशीत पार्टनर है। जिसे मेनेज सिर्फ एक ही व्यक्ति कर रहा है।

पर हाजारो लिटर ताड़ी कहा से आ रही है?

  1. शासन के नियमों में ताड़ी की मिलावट पर कड़े नियम होने के बावजूद भी नियम के रक्षक हि अनदेखा कर परवाना धारकोंविभिन्न प्रकार के हथकंडे अपना के खुली छुट देते नजर आ रहे है?
  2. शासन के नियमों की सुरक्षा कौन करे? जब शासन द्वारा जारी नियम हि सुरक्षित नहीं है तो फिर आम जनता कैसे सुरक्षित रह सकती है?
  3. जिले में शुद्ध ताड़ी के पेड़ों से कितनी ताड़ी निकल रही है? इसका डाटा किसके पास है? और रोजाना बिकने वाली हजारो लिटर ताडी का डाटा किसके पास है?
  4. ग्राहक शुद्ध अशुद्ध का पता कैसे करें? और वह किसके पास शिकायत लेकर जाएं?