कोविशील्ड लेने वाले पूरी तरह सुरक्षित : डा. बलराम भार्गव

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कोविशील्ड लेने वाले पूरी तरह सुरक्षित : डा. बलराम भार्गव
कोविशील्ड के साइड इफेक्ट का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
मुम्बई /महाराष्ट्र 
दि .02 म‌ई 2024

रिपोर्टर :- रमाकांत यादव जिल्हा प्रतिनिधि ग्लोबल महाराष्ट्र न्यूज नेटवर्क
पुरी खबर :- कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी लंदन की एस्ट्राजेनेका के बयान के बाद भारत में भी विवादों का पिटारा खुल गया है और इंटरनेट मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई है कि कोविशील्ड वैक्सीन लेने वाले खतरे की जद में हैं। जबकि विज्ञानियों का मानना है कि कोविड की वैक्सीन कोविशील्ड लेने वाले पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उन्हें डरने की जरूरत नहीं है।
आइसीएमआर के पूर्व महानिदेशक डा. बलराम भार्गव ने कोविशील्ड वैक्सीन लेने वालों को आश्वस्त करते हुए कहा, इसका साइड इफेक्ट वैक्सीन लेने के अधिकतम तीन से चार हफ्तों तक ही हो सकता है, वो भी दुर्लभ मामलों में। जबकि भारत में वैक्सीन दो-ढाई वर्ष पहले लग चुकी है। ध्यान देने की बात है कि कोविशील्ड वैक्सीन विकसित करने वाली एस्ट्राजेनेका ने लंदन की अदालत के सामने स्वीकार किया है कि इसके लगाने वालों को दुर्लभ मामलों में खून का थक्का जमने का खतरा (थ्रोम्बोसिस थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम टीटीएस) का खतरा हो सकता है। कोविड के बाद ऐसे कुछ मामले आए थे जिसमें युवाओं की भी दिल की धड़कनें रुक रही थीं। इसे कोविड से जोड़ा जा रहा था। कोविड काल में आइसीएमआर के महानिदेशक के रूप में वैक्सीन के विकास और उसके दुष्प्रभावों को जांच की निगरानी से करीब से जुड़े रहे डा. बलराम भार्गव ने कहा कि भारत में कोविशील्ड की 180 करोड़ डोज लगाई गई हैं, लेकिन लगभग नगण्य मामलों में ही इसके साइड इफेक्ट देखे गए और वे भी सामान्य उपचार से ठीक हो गए।
भारत में टीकाकरण की निगरानी की सर्वोच्च संस्था नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप आन इम्युनाइजेशन (एनटागी) से जुड़े एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि टीटीएस एक दुर्लभ बीमारी है। लेकिन भारत समेत दक्षिण एशिया के लोगों में यह और भी कम पाई जाती है। उनके अनुसार, यूरोप के लोगों की तुलना में एशिया के लोगों में यह बीमारी होने का खतरा दसवां हिस्सा होता है। एस्ट्राजेनेका ने लंदन की अदालत में यूरोपीय लोगों में कोविशील्ड लगाने के बाद दुर्लभ मामलों में टीटीएस के खतरे की बात स्वीकारी है, जो भारत की परिस्थितियों में लागू नहीं होती। कोविड टीका लगाने के बाद निगरानी के दौरान भी इस तथ्य की पुष्टि हो चुकी है। वैक्सीन लगाने के बाद कितने समय तक कोविड से सुरक्षा रहती है, इस बारे आइसीएमआर के वरिष्ठ विज्ञानी ने कहा कि पूरा देश अब कोविड से सुरक्षित है और इसके लिए नई वैक्सीन लगाने की जरूरत नहीं है
 
कोविशील्ड के साइड इफेक्ट का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
 नई दिल्ली: कोविड से बचाव के लिए ली गई वैक्सीन कोविशील्ड के साइड इफेक्ट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल हुई है जिसमे चिकित्सा विशेषज्ञी का पैनल गठित कर इसके साइड इफेक्ट की जांच कराने की मांग की गई है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने दाखिल की है। दाखिल अर्जी में कहा गया है कि कोविशील्ड वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका द्वारा लंदन में माना गया है कि इसके कारण बहुत बिरले मामली में खून का थक्का जमना या प्लेटलेट्स की संख्या घटना आदि शामिल है। बहुत से युवाओं को भी दिला के दौरे पड़ने की घटनाएं हुई है।