राजनीति की पेच मे फंसा दुर्गापुर-उर्जानगर, न नगरपालिका और नहीं महानगरपालिका?

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राजनीति की पेच मे फंसा दुर्गापुर-उर्जानगर, न नगरपालिका और नहीं महानगरपालिका?

चंन्द्रपुर/महाराष्ट्र
दि.05 फरवरी 2022

दुर्गापुर सवांददाता-

चंन्द्रपुर :// दुर्गापुर एवं उर्जानगर दोनों ग्राम पंचायतों को मिलाकर  नगरपालिका बनाने की मांग 6 महीने पहले तब जोर शोर से उठी थी जब चन्द्रपुर मनपा के विस्तार की संभावना जोर पकड़ रहा था। हालांकि आज के समय में न मनपा का विस्तार होते दिख रहा है और नहीं दुर्गापुर उर्जानगर दोनों  ग्राम पंचायतों को मिलाकर नगरपालिका बनते हुए नजर आ रहा है।
सोचने वाली बात यह है कि चन्द्रपुर से लेकर मुंबई तक दुर्गापुर उर्जानगर ग्राम पंचायतों के साथ भेदभाव क्यों हो रहा है? 1999 से नगरपालिका के सभी शर्तो को पूरा करनेवाली दुर्गापुर उर्जानगर  22 वर्ष बाद भी ग्राम पंचायत के ग्राम पंचायत ही है। जबकि उक्त 22 वर्ष में  जिले में दर्जन भर छोटे छोटे ग्राम पंचायतों की स्तर नगरपंचायत और नगरपालिका में तब्दील हो चुकी है।
फिर ऐसा क्या कमी दुर्गापुर उर्जानगर ग्राम पंचायतों में है कि इसकी स्तर बढ़ती नहीं है। दोनों मिलाकर 40 हजार जनसंख्या रहने के अलावा अकृष्क क्षेत्र सहित नगरपालिका के सारी शर्तो को पूरा करते रहने के बावजूद  ग्राम पंचायत से ऊपर दुर्गापुर उर्जानगर बढ़ ही नहीं पा रहा है।

जिम्मेवार कौन?

क्षेत्र में  नगरपालिका  बनवाने में सबसे ज्यादा योगदान उस क्षेत्र के राजनेताओं का होता है। यहि काम उस क्षेत्र के पालक मंत्री भी करवा सकते हैं। आज के समय में दुर्गापुर उर्जानगर के विधायक और पालक मंत्री अलग अलग पार्टी से हैं। दोनों के अपने अपने समर्थक है। दोनों के समर्थकों की इच्छा मनपा विस्तार में भले ही ना हो परन्तु नगरपालिका बनाने की मांग में दोनों ही दलों के समर्थक शामिल है। दोनों दलों के कई लोंग चन्द्रपुर से मुंबई जाकर अनेको विधायक, पालक मंत्री, कई मंत्रियों, प्रधान सचिव से मुलाक़ात  की,मीटिंग  में भाग ली। बावजूद नगरपालिका बनाने के फाइल एक कदम भी आगे नही बढ़ा है।
स्पष्ट है कि नेता, विधायक और मंत्री दुर्गापुर उर्जानगर को नगरपालिका बनवाने के लिए अपने समर्थकों को आश्वासन देने के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि सर्वपक्षीय कार्यकर्ताओं द्वारा सर्वपक्षीय नेताओं, विधायकों, और मंत्रियों से मिलने के बावजूद अबतक दुर्गापुर उर्जानगर को मिलाकर नगरपालिका बनाने के संबंध में कुछ नहीं हुआ है।

सौतेला व्यवहार कहना गलत नहीं.!

जिस प्रकार जनप्रतिनिधियों के कार्य दुर्गापुर उर्जानगर के बस्तियों के वासियों के साथ रहा है ,इससे यह स्पष्ट नजर आ रहा है कि जिले के अन्य क्षेत्रों के मुकाबले यहाँ पर विकास कम हुआ है जबकि प्रदूषण चरम पर पहुंचा हुआ है। पिछले 9 वर्षों में सैकड़ो पेड़ काटे गए लेकिन लगाए नहीं गए। उर्जानगर ग्राम पंचायत के वार्ड नं 1,5 और 6 तथा दुर्गापुर ग्राम पंचायत वार्ड नं 1,2,3 और 4 में एक भी खेल का मैदान नहीं है। एक भी ओपेन स्पेस विकसित नहीं है। दर्जनों सड़क की जगह और ओपेन स्पेस अतिक्रमण का शिकार है। दोनों ग्रामपंचायतों का अनेकों काम विवादग्रस्त है।पानी निकासी वाला नाली सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। संबंधित इंजीनियर, विस्तार अधिकारी, सवर्ग विकास अधिकारी का उक्त दोनों ग्रामपंचायतों पर शायद ही कभी दौरा होता है। कोई व्यक्ति उचित कारण के साथ शिकायत करता भी है तो उसपर कार्रवाई नहीं होती।