प्रबंधन की लापरवाही के कारण मेश्राम की गई जान   सिटीपीएस बना हुआ है जंगली जानवरों के लिये सुरक्षित अड्डा

48

प्रबंधन की लापरवाही के कारण मेश्राम की गई जान
 
सिटीपीएस बना हुआ है जंगली जानवरों के लिये सुरक्षित अड्डा

झुडपी क्षेत्र में रहते बाघ तेंदुआ,पैदल चलना, साइकिल मोटरसाइकिल चलाना नहीं है सुरक्षित

चंन्द्रपुर/महाराष्ट्र
दि.18 फरवरी 2022
रिपोर्ट:- कामताकुमार सिह,दुर्गापुर

पुरी खबर:- बुधवार की रात लगभग 10.30  बजे सिटीपीएस से  ड्यूटी कर साइकिल से लौट रहे भोजराज मेश्राम उम्र साढ़े 58 वर्ष पर बाघ ने हमला कर दिया और घसीट कर झाड़ियों में लेकर चला गया। दूसरे दिन सुबह दो टुकड़ों में शव प्राप्त हुआ। गर्दन को काटकर एक तरफ छोड़ दिया जबकि धड़ को दूसरी तरफ खिंचकर ले जाकर छोड़ा। शव के दोनों पंजो को खाने के अलावा शरीर के कई भागों का मांस खाया। शव की स्थिति भयावह हालत में मिली। सी आई एस एफ , वनविभाग और भोजराज मेश्राम के सहकर्मियों ने  शव ढूढने और  शल्य परीक्षण के लिए सरकारी दवाखाना चन्द्रपुर ले जाने में मदद की।

सिटीपीएस के ठेकेदार कुणाल  इंटरप्राइजेज के पास  कार्यरत   भोजराज मेश्राम बुधवार को दोपहर 3 से रात के 11  बजे की पाली में ड्यूटी में था। वह  सिटीपीएस के 210 वैगन ट्रीपलर में कार्यरत था। रात्रि पाली के रिलीवर को थोड़ा जल्दी आ जाने पर मेश्राम 10.30 बजे ड्यूटी स्थल से साइकिल से घर के लिये निकला। थोड़ी ही दूर आगे बढ़ा था कि बाघ ने हमला कर दिया। इसकी जानकारी इसी रास्ते से दूसरे कामगारों द्वारा आवाजाही करने के दौरान साइकिल गिरा हुआ देखा। हैलमेट और चप्पल भी इधर उधर गिरा देखा गया। खून भी गिरा हुआ था। तब अंदाज लगाया गया कि यह जंगली जानवरों का करामात हो सकता है। उसके बाद सी आई एस एफ और वनाधिकारियों को खबर की गई। संबंधित विभाग के अधिकारी गण आये परन्तु अंधेरे और जंगली टाइप का क्षेत्र रहने की वजह से शव को ढुढ़ नहीं पाए। सुबह के पौने 8 बजे क्षत विक्षत लाश मिला।

जो डर था वही हुआ

आखिर जिसका डर था वही हुआ। सालों से यहीं संदेह बना रहता था कि  पैदल, साइकिल और दो पहिया से जानेवाले कामगारों  कहीं हिंसक जानवर का मुँह का निवाला न बन जाये। बुधवार की रात को भोजराज मेश्राम को बाघ ने मारा , तब जाकर सिटीपीएस प्रबंधन की नींद खुली और अब वनविभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मीटिंग पर मीटिंग करना शुरू कर दिया है। पिछले कई सालों से सिटीपीएस परिसर जंगली जानवरों का आशियाना बना हुआ है । ढाई वर्ष पूर्व  एक सी आई एस एफ  जवान के 8 वर्षीय बच्ची को क्वार्टर के पास से तेंदुआ ने उठाकर ले गया था और उसे मार दिया था। इसके बाद भी सिटीपीएस प्रबंधन नहीं सुधरी। तीन महीने पहले सिटीपीएस कर्मी पर बाघ ने हमला कर दिया था जिसमें वह व्यक्ति बुरी तरह घायल हो गया था। तब सिटीपीएस प्रबंधन सिर्फ लीपापोती ही किया। जंगली जानवरों को यहाँ से हटाने का कोई भी कारगर तरीका नही अपनाया।

घटना स्थल पर सिटीपीएस प्रबंधन के अलावा वन विभाग के डी एफ ओ- खारे , राउंड फारेस्ट ऑफिसर राहुल कारेकर और उनके टीम पहुँची। आर एफ ओ कारेकर ने बताया कि हमारे वरिष्ठों का सिटीपीएस प्रबंधन के साथ मीटिंग चल रहा है। जैसा निर्णय होंगा होंगा, उसपर सख्ती से कार्यवाही करेंगे और आगे से ऐसे हमले से बचाव का पूरा व्यवस्था किया जाएगा। मृतक के परिवार को वनविभाग के नियमानुसार 15 लाख रुपये दिए जाएंगे।

मांग पर सहमति बनी

मृतक के परिवार, कामगारों के प्रतिनिधि, ठेकेदार के प्रतिनिधि और सिटीपीएस के प्रतिनिधियों के बीच कुछ हद तक सहमति बन गयी है। मृतक के एक बेटे को ठेकेदारी मार्फ़त ड्यूटी,  पाँच लाख रुपये , वनविभाग की तरफ से 15 लाख रुपये दिए जायेंगे।  उसमें से अंतिम संस्कार के लिये 50 हजार रुपये नगद और ढाई लाख रुपये का चेक मृतक के परिवार को दिया गया है।

घटना के जिम्मेदार कौन?

महीनो से लगभग हर दिन जंगली जानवरों देखे जा रहे थे।बावजूद सिटीपीएस प्रबंधन किसी प्रकार से एहतियाती कदम नहीं उठा रही थी। पिछले एक सप्ताह से इसी क्षेत्र में एक बाघिन देखा जा रहा था। परन्तु सिटीपीएस प्रबंधन कुंभकर्णी नींद लेने में लगा था।

पिछले 2 वर्ष में 7 को जंगली जानवरों ने मारा

16 फरवरी 22 को  सिटीपीएस परिसर में भोजराज मेश्राम , 27 सितंबर 2021 को बुजुर्ग -रत्नापरखी की लाश वेकोलि दुर्गापुर क्षेत्र के जंगल में मिला था। 5 महीने पूर्व वेकोलि दुर्गापुर के एक लेबर कैम्प के पास 26 वर्षीय युवक पर बाघ ने किया था हमला जिसमें जान चली गयी थी। वेकोलि दुर्गापुर के  डेढ़ वर्ष पूर्व  एक युवक  का लाश तेंदुआ द्वारा खाया हुआ क्षत विक्षत लाश मिला था। 2 वर्ष पहले दुर्गापुर खदान के लिये बन रहे टाइम ऑफिस के पास एक प्राइवेट चौकीदार को तेंदुआ ने हमला कर के जान ले ली थी। सिटीपीएस में एक सी आई एस एफ के जवान के 8 वर्षीय सुपुत्री को तेंदुए ने उठाकर अंदर के क्षेत्र में ले जाकर उसे मार दिया था।