दलाल” पत्रकार के हस्तक्षेप से मनपा के पार्षद-अधिकारी त्रस्त टेंडर न मिलने पर व्यथित होकर अधिकारी को कर रहा है परेशान

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दलाल” पत्रकार के हस्तक्षेप से मनपा के पार्षद-अधिकारी त्रस्त

टेंडर न मिलने पर व्यथित होकर अधिकारी को कर रहा है परेशान

चंद्रपुर / विशेष प्रतिनिधि
जनसंपर्क विभाग का यह दायित्व है कि वह मीडिया के माध्यम से जनता को सूचना प्रसारित करे। हालांकि, जनसंपर्क विभाग को अंधेरे में रखकर कुछ अधिकारी आपसी जानकारी केवल स्वयंम हितों वाले  को ही दे रहे हैं। तो यह अन्य मीडिया को सूचनाओं से अनभिज्ञ रखने का एक रूप होता जा रहा है। निगम में होने वाली घटनाओं, कार्यों, महत्वपूर्ण निर्णयों, बैठकों और आयोजनों में दलाल पत्रकार के बढ़ते दखल से पार्षद-अधिकारी व्यथित हैं। पार्षद-अधिकारी निजी तौर पर कह रहे हैं कि यह व्यक्ति पत्रकार होने के वजह से खुलकर विरोध नहीं कर सकता।

हे पवनदेव इन पत्रकारों से हमारी मुक्ति करो, ऐसी आराधना कर रहे है.

महानिगम ने चार साल पहले स्थाई जनसंपर्क अधिकारी नियुक्त किया था। लेकिन आधिकारिक सूचना जनसंपर्क अधिकारियों के माध्यम से आने के बजाय कुछ इच्छुक पत्रकारों के माध्यम से सामने आ रही है। इसी तरह मनपा में कुछ पत्रकार ने अपना दम बिठा लिया। छोटे और बड़े प्रेस नोट लिखने लगे। इसका भुगतान उसे मिलने लगा। हमारे बिना शोहरत नहीं है, अधिकारियों ने ऐसे नाचना शुरू कर दिया और अवसर का सोना बना दिया। निगम के प्रशासनिक कार्यों में दखल बढ़ा। हतबल अधिकारी यह भी भूल गए कि मनपा में एक जनसंपर्क विभाग है और इस हित में पत्रकार को हर कार्रवाई, बैठक या दौरे की जानकारी देना शुरू कर दिया।

ज्ञात हो कि, नगर निगम में विभिन्न विषयों पर होने वाली सभा में जनसंपर्क अधिकारी के अलावा अन्य किसी भी पत्रकार को उपस्थित रहने की अनुमति नही होती. लेकिन चंद्रपुर मनपा में इसके विपरीत देखने को मिल रहा है। यहां हर एक बैठक में एक निजी पत्रकार बैठता है। इसकी वजह से बैठक में होने वाले महत्वपूर्ण मुद्दे, चर्चा बाहर वायरल होती है।
आज इतनी बड़ी जनसंपर्क व्यवस्था के बावजूद कुछ अधिकारी केवल उन्हीं   को साथ लेकर घूम रहे है, जिनका कुछ मामलों पत्रकार में निहित स्वार्थ है। चाहे डॉ दीक्षित के श्वेता अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई हो या निजी अस्पताल में कोविड मरीजों की आर्थिक लूट। अस्पताल के बारे में  निगम के ऑडिट की खबर भी माध्यम को नहीं दी गई | बल्कि इन खास पत्रकार को दी गई | इसमें संदेह है कि क्या पदाधिकारियों और अधिकारियों ने अपने हितों की रक्षा के लिए दैनिक और डिजिटल मीडिया से बड़ी कार्रवाई की खबर छूपाई। निगम ने नोटिस जारी कर मरीज का अतिरिक्त बिल तत्काल वापस करने का आदेश दिया है। एक जिम्मेदार अधिकारी ने कहा, “मुझे नहीं पता कि आदेश कब जारी किया गया था।” क्या सरकारी कोविड अस्पताल के सामने अवैध कोविड अस्पताल में छापेमारी की गई? पूछने पर उसने जानकारी को नजर अंदाज कर अपने वरिष्ठों को इशारा किया। सरकारी कोविड अस्पताल के सामने निगम की टीम ने डॉ. शफीक शेख के अस्पताल में छापेमारी की खबर कुछ स्थानीय समाचार चैनलों पर प्रकाशित की थी। जब इस बारे में और जानने के लिए पूछा तो चौंक गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इस तरह की किसी कार्रवाई के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। इससे पता चलता है कि मुट्ठी भर पत्रकार को साथ लेकर कुछ अधिकारी कार्रवाई करते हैं। कहा गया कि डॉ शफीक शेख के अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई पहले मनपा ने की थी. अगले दिन जिला प्रशासन ने कार्रवाई की घोषणा की। इसका मतलब साफ है कि कुछ अधिकारी पत्रकारों को अपने हित में लेकर कार्रवाई करते हैं‌। यह सत्य है कि दलाल अधिकारियों, पदाधिकारियों, ठेकेदारों और नगरसेवकों पर दबाव बनाकर वसूली का काम कर रहा है। इसी रिश्ते का फायदा उठाकर उसने अपने निजी वाहन चंद्रपुर नगर निगम को भाड़े पर दे दिए। उनके दूसरे सहकर्मी ने कुछ अधिकारियों और नगरसेवकों पर अपने निर्माण के लिए रेत, ईंट और सीमेंट बनाने का दबाव डाला। पिछले 2 माह से प्रशासन ने चंद्रपुर नगर निगम में सोशल मीडिया से जनसंपर्क के लिए टेंडर जारी किया है. ठेका लेने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन, समर्थन के अनुभव की कमी के कारण, प्रयास विफल रहा। अब हे काम नागपुर की एक कंपनी को दे दी गई। जिसके बारे में सोशल मिडिया पर घमासान चल रहा है | सोशल मीडिया से जनसंपर्क के लिए टेंडर न मिलने पर यह पत्रकार व्यथित होकर अधिकारी को परेशान कर रहा है | पता चलता है की कुछ दिनो से नींद ख़राब हुई है | कूछ नगरसेवकों को फुसलाकर महानिगम की बदमानीजनक प्रेसनोट निकाली है | अब उनको इस डर से जा चुकी है कि मनपा मे उनकी दलाली खत्म हो जाएगी, उनकी कमाई में कटौती नहीं होगी, उन्होंने चैनल पर कही समाचार प्रकाशित किये। इतना ही नहीं, उन्होंने अन्य स्थानीय समाचार चैनलों के प्रतिनिधियों को भी शराब का लालच दिखाकर समाचार प्रकाशित किया। इस “अवलिया” पत्रकार ने पुलिस और आरटीओ विभाग में ऐसा ही एक घोटाला शुरू किया है। खास बात यह है कि एक बार उन्हें पुलिस ने पीटा भी था। अब देखते है उसका एपिसोड कहा ख़तम होता है |