आपदा को अवसर मे बदल माथोली मे खुले आम बेच रहे शराब, सुबह 4 बजे से धन के दर्शन करते अवैध शराब तस्कर

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आपदा को अवसर मे बदल माथोली मे खुले आम बेच रहे शराब,
सुबह 4 बजे से धन के दर्शन करते अवैध शराब तस्कर

चन्द्रपुर/महाराष्ट्र

रिपोर्ट:- हनिफ शेख, संवाददाता

घुग्घुस : कोरोना महामारी कि चेन तोडने के लिए शासन प्रशासन द्वारा वीगत 15 मई तक के लिए लाॅकडाउन का निर्णय लिया गया है वही इस लाॅकडाउन परीचालन मे आम लोगो के लिए जरूरतमंद सामग्री कि उपलब्धता के लिए आंशिक छुट प्रदान कि गई है, जिसमे मास्क, सोशल डिस्टेसिग, नियमो का पालन करना भी अनिवार्य किया गया है। लाॅकडाउन परीस्थिती मे भी अधिकांश व्यापारी, ठोक विक्रेता, मौकापरस्त समय का लाभ उठाकर समान के दाम को दो गुना चार चौगुना बेचकर अधिक मुनाफा कमाने कि चक्कर मे कुछ दुकानदार कम समय मे करोडपती बनने की चाह रखने वाले इसमे किराणा व्यापारी की तर्ज पर अब शराब के होलसेलर सहीत चिल्लर विक्रेताओ कि भी सोच दुगनी बढ गई है। यही घुग्घुस सीमा से सटे वणी शिरपूर पोलिस थाना हद मे आनेवाला कैलास नगर माथोली मे राजु अन्ना कि शराब कि दुकान मे भी अब नियमो को नजरअंदाज करके शराब धडल्ले से बेची जा रही है। छिप छिपाते हुए शराब भट्टी को सुबह चार बजे से खोलकर शराब तश्करी करनेवालो को माल दिया जा रहा है। तश्करी करनेवाले बोतल का लेबल निकालकर शराब कि तश्करी मोटरसायकल ,चौपहीया वाहन से घुग्घुस, गढचादूर, राजुरा ,चंद्रपुर जिले के अन्य ठीकाणो मे बडी माञा शराब कि तस्करी कर रहे है। शासन द्वारा जारी नियमो का तोड निकाल सात बजे से पहले ही शराब कि दुकान न खोलते हुए बाजु मे बन रहे मकान से गुर्गे द्वारा अवैध शराब कि बिक्री दुगना दामो से सुबह 4 बजे सुरू हो जाती है।

कैलास नगर माथोली भट्टी से राजु अन्ना होलसेलर भी लाॅकडाउन मे गरीबो को दुगना दाम से अवैध शराब परोस रहा है दुकान मे शराब कि खरेदी करने वाले भीड मे लाॅकडाउन मे रखे गए नियम सोशल डिस्टेसिग ,मास्क ,अदी का सरासर उल्लंघन किया जाता है जहां पर प्रशासकीय अधिकारी और पुलीस प्रशासन कि कोई ठोस कारवाई तक नही होती यही नियम आम जनता के बीच सायरन बजाकर आनेवाली डंडो से बात करनेवाली यह पुलीस का छापा शराब कि दुकान पर क्यो नही होता?

क्या यह लाॅकडाउन का नियम सिर्फ आम लोगो के लिए ही बना है?

ऐसे सवाल आज जनता मे चर्चा का विषय बने हुए है। शराब कि दुकान मे भीड करने वाले लोगो मे कोरोना बिमारी का कोई भय तक नही है साथ पुलीस प्रशासन भी इस ओर अनदेखी क्या साबित करती है?