निलजई कोल का झोल.. वणी मे लाल पुलिया के प्लाटो पर खाली हुये कोयले से भरे निरजई अफरा-तफरी के ट्रक?

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निलजई कोल का झोल..

यवतमाल / महाराष्ट्र
दि. 24 अप्रैल 2021

पुरी खबर:- यवतमाल जिले के वणी क्षेत्र अंतर्गत हुए निलजई कोयला खदान प्रकरण की चर्चा आज जोरों पर है हमारे द्वारा इस प्रकरण मे लिप्त तथा घटित घटना से क्रम से हमने अपने पाठकों तक समय समय पर पहुचाया है| हमारा मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय संम्पत्ति की लूट मे शामिल अवैध कोयला व्यापारियों को उनकी सही जगह.पहुचाना और राष्ट्रीय संम्पति की  सुलेआम हो रही लुट को रोकना है| हमने हमारे पिछले भागो मे 2200 टन सबसिडी का कोयला, जो निलजई कोयला खदान से प्राईड मेटल के डिओ से निकला था उस 2200 टन सबसिडी के कोयले को पुनः प्राप्त करने मे पुलिस अब तक नाकाम रही है। ऐसी जानकारी हमारे सत्रों द्वारा प्राप्त हुई हैं।

पुलिस द्वारा पकड़े गए 7 अपराधियों और मुख्य अपराधी शहजाद शेख जो प्राइड मेटल इंडस्ट्रीज का संचालक है। उसे पुलिस पकडने मे अब तक नाकाम रही है. घटना स्थल से पकड़ा गया अटल बिहारी गिरी जिसका इस अफरा-तफरी में मुख्य योगदान रहा है.

इस प्रकरण के बाद जांच एजेंसि और अवैध कोयला व्यापारियों के बिच बिचौलियों की भूमिका निभाने वाला गुप्ता इस अफरा-तफरी के कोयले की बंदरबांट में उतना ही गुनाहगार हो सकता है।

इसी प्राईड मेटल के डिओ से निकला कोयला हमारे सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार वणी लाल पुलिया स्थित वर्धमान कांटा, बाबा बालकनाथ काटा, बालाजी कांटा, जैयतई काटा और साईं बाबा काटा इन धर्म काटो मे यह प्राईड मेटल के डीओ के कोयले से भरे ट्रकों ने काटा कर वणी लाल पुलिया स्थित ना. भाई, मुं. साहू, ह. अग्रवाल, ठाकुर, मो . कोल, फोलीवाला इन कोयला डालो पर सब्सिडी के कोयले की अफरा-तफरी की गई है?

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यदि इस पूरे प्रकरण की जांच पूरी कर्तव्यनिष्ठा से हो जाए तो शायद इस अफरा-तफरी के अपराध में शामिल प्लाट धारकों पर भी गुनाह दर्ज किया जा सकता है पर ऐसा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है मुख्य अपराधी शहजाद शेख से क्या अटल बिहारी गिरी की सांठगांठ थी या फिर शहजाद और गिरी के बीच लागत लगाए किसी अन्य व्यापारी की भी भूमिका है।

  • आज उस लागत लगाने वाले अन्य व्यापारी का पता लगाना जरूरी हो गया है. पुलिस द्वारा पीसीआर लेने के बाद अटल बिहारी गिरी ने डंडे के सामने 1 दिन पूर्व की घटना के संचालक का नाम लिया?
  • क्या पुलिस ने अपनी जांच में उसे शामिल किया है?
  • गिरी के बताए नामों तक पुलिस पहुंच पाई?[
  • ९३ ट्रको से निकाला गया कोयला इन टालों पर बेचा गया?

क्योंकि पूरे घटना में कमजोर कड़ियों पर ही अपराध दर्ज किया गया है बंदरबांट में शामिल आकाओं का और 2200 टन अफरा-तफरी के कोयले का अभी तक “पता लग पाया है या नहीं” यह भी संदिग्ध है।