कोयले का झोल …!! कोयले मे पकडा गया “शहजाद” बिचौलिया तो नहीं ? !! निलजई खदान कि घटित कोयला हेराफेरी प्रकरण !!

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कोयले का झोल …!!

कोयले मे पकडा गया “शहजाद” बिचौलिया तो नहीं ?

!! निलजई खदान कि घटित कोयला हेराफेरी प्रकरण !!

यवतमाल/महाराष्ट्र

दि.27 मार्च 2021

यवतमाल:- यवतमाल जिले की वणी की निलजई खदान कि घटित कोयला हेराफेरी की घटना से पूरा सरकारी तंत्र सवालों के घेरे में आ चुका है। सरकार द्वारा दिया गये सब्सिडी के कोयले की हेराफेरी से हो रहा करोड़ों का नुकसान और इसी सब्सिडी के कोयले को उसकी सही जगह पहुंचाने का जिम्मा आज किस सरकारी तंत्र के जिम्मे है? यह समझ के परे है!

पूछे जाने पर अधिकारी हमारे क्षेत्र के बाहर क्या होता है, इसके हम जिम्मेदार नहीं, हमारा काम कोयला देना है, हमारा काम यह नहीं है कि वह कोयला कहां जा रहा है, उसकी हम जांच करें.

यह बात समझने लायक होगी तब भी कोयला जैसे राष्ट्रीय संम्पती के करोड़ अरबो रूपए की लुट हो रही है, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

यवतमाल जिले की निलजई खदान में कोयले के प्रकरण में पकड़ा गया शहजाद, यह मोहरा तो नहीं यह प्रश्न यहां पर उपस्थित हो रहा है?

ऐसे और भी कई प्रश्न आज उठ रहे हैं पर इसका जवाब देने लिए कोई भी सामने नहीं आ रहा है, क्या कारण है?

दूसरी बार शहजाद का नाम आना, शहजाद का इन व्यापारियों के साथ मिलिभगत की ओर इशारा करता है, या शहजाद को इन व्यापारियों ने नियुक्त किया गया है?

चंद्रपुर जिले के 26 गाड़ियों का प्रकरण और उन गाड़ियों में MSMC का कोयला खुले बाजार में पकड़ा जाना और उसके बाद आरोपियों का आसानी से छूट जाना! फिर पुलिस अपनी जांच का दायरा एम एस एम सी के अधिकारियों तक सीमित करना, यह सभी गतिविधियां आरोपियों को अभय देने की ओर इशारा करती है। जिससे आरोपींयो के हौसले बुलंद कर जगह बदल पुनः उसी राह चल एक नए कांड को अंजाम देने की राह पर चल पड़ते हैं।

 


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निलजई खदान में प्राइड मेटल के दो डीओ 4220 टन सब्सिडी का कोयला आवंटित होना। जिसमें 96 गाड़ियां निकलना और इसी डियो में 3 गाड़ीयों का पकड़ा जाना, फीर बाकी 93 गाड़ियां कीस प्लाट पर खाली हुई है? यह तो पुलिस की जांच में सामने आ ही जाएगा।

93 गाड़ियों की बंन्दर बांट के सहयोगी प्लाट मालिकों का सहयोग, पुलिस की जांच में कई प्लाट के मालिक की हिस्सेदारी, वणी के प्लाट पर क्या सिर्फ यह 93 गाड़ियां इन्हीं प्लाट पर खाली हुई है? यदि वही खाली हुई है तो क्या पुलिस ने उस माल को जप्त किया है? या चंद्रपुर स्थित कोयला डेपो पर भी इस माल की बंदरबांट हुई है? या फिर नागपुर के कापसी नाके में स्थित प्लाट पर इन गाड़ियों का माल पहुंचा है?

खैर यह तो पुलिस की जांच के बाद सामने आएगा पर क्या जांच पूरी कर्तव्यनिष्ठा से होगी या फिर पुलिस सरकारी तंत्र के ऊपर अपनी जांच सीमित करेगी यह आनेवाला वक्त बतायेगा.

चंद्रपुर जिले में पडोली नगाड़ा के कोयला डालो पर पिछले कुछ वर्षों में पुलिस के द्वारा मारी गई धाड में कई बड़ी मछलियां जाल में फंसी थी। कैलाश अग्रवाल जैसे बड़े व्यापारी को कुछ दिन फरार होना पड़ा था परन्तु उसके बाद न्यायालय से उन्हें जमानत मिलना। करोडो रुपए की राष्ट्रीय संम्पती की चोरी करने वालों को आसानी से जमानत मिलने पर जांच अधिकारीयों पर उस समय उंगलियां भी उठी थी।

यवतमाल के वणी स्थित कोयला खदान में भी ऐसा ही प्रकरण होता हुआ दिखाई दे रहा है। यवतमाल पुलिस यदि गहरी जांच करती है तो अनेक बड़ी मछलियां जाल में फस सकती है, इसमें कोई संदेह नहीं।

तडाली जिएम अंतर्गत हुआ यह घोल को वेकोली ने गंम्भीरता से लेकर इसकी जांच विजिलेंस द्वारा कराई जानी चाहिए। ऐसी मांगे अब जोर पकड़ रही है।

नौ दिन बाद भी पुलिस की गीरफ्त से दूर :-  निलजई खदान के मुख्य आरोपी 9 दिनों बाद भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। यदि पुलिस अपनी जांच का दायरा बढ़ाती है, तब शायद पुलिस की गिरफ्त में यह दो मुख्य आरोपी लग सकते हैं।

परंतु यवतमाल पुलिस इस विषय को कितनी गंभीरता से लेती है, यह उनकी कर्तव्यनिष्ठा पर आधारित है।