देश में लॉकडाउन के बाद अब तक रोज़ औसतन चार मज़दूरों की मौत हो रही है.

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देश में जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है यानी 25 मार्च 2020 से लेकर अब तक रोज़ औसतन चार मज़दूरों की मौत हो रही हैं

नागपुर : कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान किए लगभग दो महीने हो चुके हैं. लॉकडाउन के अचानक हुए इस ऐलान के बाद देश में हज़ारों प्रवासी मज़दूरों को अपने घरों के लिए पैदल ही चलना पड़ा क्यों अंतरराज्यीय बस और रेल सेवाएं बंद की जा चुकी थीं.
24 मार्च से लेकर अब तक देश भर में हुए कई सड़क हादसों में भी बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूरों की जान गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लॉकडाउन के बाद सड़क हादसों और सेहत बिगड़ जाने से अब तक कुल 208 मज़दूरों की मौत हो चुकी है.
लॉकडाउन की घोषणा इसलिए की गई थी ताकि कोरोना वायरस के कम्युनिटी ट्रांसमिशन को रोका जा सके.
पीएम मोदी ने लोगों से घरों में रहने और फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील की थी. लेकिन अचानक हुई घोषणा के बाद भागमभाम सी मच गई और हज़ारों मज़दूर पैदल, साइकिल रिक्शा से और ट्रकों में लदकर जाने लगे.

लॉकडाउन के बाद गई जानें

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार 29 मार्च तक कोविड-19 संक्रमण की वजह से देश में 25 मौतें हुई थीं जबकि लॉकडाउन की वजह से पैदा हुई समस्याओं से 20 लोगों की मौत. 20 मई तक देश में लगातार पैदल चलते-चलते या सड़क हादसे का शिकार होकर 200 प्रवासी मज़दूर मारे जा चुके थे.

मीडिया रिपोर्ट्स के एक विश्लेषण से पता चला है कि लॉकडाउन के बाद से 42 सड़क हादसे, 32 मेडिकल इमर्जेंसी और पांच ट्रेन हादसे हुए हैं जिनमें सैकड़ों मज़दूरों की जान गई.

इस विश्लेषण के अनुसार, मज़दूरों की सबसे ज़्यादा मौतें सड़क हादसों में हुईं.

सड़क हादसों के बाद हज़ारों किलोमीटर के रास्तों पर पैदल चलते-चलते सबसे ज़्यादा मज़दूरों की मौत हुई है. विश्लेषण से पता चला है कि पैदल चलते-चलते ज़्यादा थकान की वजह से मरने वालों में हर उम्र के लोग शामिल हैं: युवा और बुज़ुर्ग दोनों.

65 साल के रामकृपाल ने मुंबई से उत्तर प्रदेश स्थित अपने घर पैदल ही जाने का फ़ैसलाकिया था. उन्होंने पैदल चलकर और लिफ़्ट लेकर 1,500 किलोमीटर की दूरी तय भी कर ली थी लेकिन अपने गाँव पहुंचकर वो इस कदर थक चुके थे कि उनकी मौत हो गई.

एक अन्य घटना में, 12 साल की एक बच्ची तेलंगाना के मुलुग ज़िले से छत्तीसगढ़ के बीजापुर के लिए पैदल ही निकली थी. वो तीन दिनों तक लगातार सैकड़ों किलोमीटर तक चली, घने जंगलों का रास्ता तय किया लेकिन फिर रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.

बच्ची लॉकडाउन से पहले अपने चाचा समेत 13 अन्य प्रवासी मज़दूरों के साथ मिर्च के खेतों में काम करने गई थी.

ट्रेन दुर्घटना

मई की शुरुआत में महाराष्ट्र में औरंगाबाद के पास हुई रेल दुर्घटना में 16 मज़दूर मारे गए थे.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार ये मज़दूर 40 किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद थककर सतना के पास रेलवे ट्रैक पर ही सो गए थे. उन्हें लगा था कि वहां से कोई ट्रेन नहीं गुजरेगी लेकिन वो एक मालगाड़ी की चपेट में आ गए. इस दुर्घटना में 20 में से 16 मज़दूरों की मौत हो गई थी.

एक अन्य घटना में, पैदल अपने घर को जाते हुए दो प्रवासी मज़दूर छत्तीसगढ़ के कोरिया ज़िले में एक मालगाड़ी की चपेट में आकर मारे गए थे.

ये दुर्घटना अप्रैल महीने में हुई थी. इससे पहले मार्च में, गुजरात के वापी ज़िले में भी पैदल चलती हुई दो महिला मज़दूरों की मालगाड़ी की चपेट में आकर मौत हो गी थी.